NPS vs PPF क्या है, जाने इन दोनों में से कौन सा बेहतर Retirement Option है?

Sudhir Kumar
10 Min Read

रिटायरमेंट का कॉन्सेप्ट हम सबको बहुत अच्छा लगता है। रिटायर होने के बाद आपको ऑफिस जाने की चिंता नहीं करनी होती है। रोज – रोज सुबह तैयार होने, ट्रैफिक जाम में फंसने और ऑफिस में काम करने का प्रेशर नहीं रहता है। आपके पास अपने लिए बहुत सारा टाइम होता है।

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आप अपने सारे शौक पूरे कर सकते हैं। आप घंटों प्राणायाम कर सकते हैं या जब नींद आए तो भरपूर नींद ले सकते हैं। दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ टाइम स्पेंड कर सकते हैं।

दो चीजें आपकी रिटायरमेंट को लेस देन आइडियल बना सकती हैं। पहला है महंगाई और दूसरा है इन्क्रीजिंग लाइफ एक्सपेक्टेशंस। यानी लोग अब लंबा जीते हैं। इन दोनों के कॉम्बिनेशन का मतलब है कि अगर अपनी रिटायरमेंट के लिए सही से सेव नहीं किया तो आप दिक्कत में पड़ सकते हैं।

इन्हीं कारणों की वजह से गवर्नमेंट ने रिटायरमेंट सेविंग करने के लिए ऑप्शंस अवेलेबल करवाए हैं। सरकार चाहती है कि लोग खुद अपनी सेविंग से रिटायरमेंट के लिए पैसा क्रिएट करें। स्पेशली वो लोग जिनके पास सरकार द्वारा अवेलेबल करवाए जाने वाले सोशल सिक्योरिटी कवर नहीं हैं। टैक्स बेनिफिट के थ्रू गवर्नमेंट लोगों को एनकरेज भी करती है।

इसके लिए दो फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स हैं। पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी पीपीएफ (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस (NPS)। ये दोनों प्रोडक्ट इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी (Section 80C) में शामिल हैं।

यानी आप इन प्रोडक्ट में इन्वेस्ट करके टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। इस लेख में हम बात करेंगे कि इन दोनों प्रोडक्ट में से रिटायरमेंट के लिए कौन सा ऑप्शन बेटर है। तो चलिए स्टार्ट करते हैं।

NPS vs PPF

पीपीएफ (PPF) स्कीम 1968 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने शुरू किया था। इस स्कीम की पीछे सोच थी कि ऐसे लोग जो अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में काम कर रहे हैं या एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड के दायरे में नहीं आते, वह इसमें इन्वेस्ट करके अपने लिए रिटायरमेंट फंड बना सकते हैं।

देश के ज्यादातर लोग इस स्कीम का फायदा उठा सकें इसलिए इस स्कीम को पोस्ट ऑफिस पर भी अवेलेबल करवाया गया। पीपीएफ लंबी अवधि का सेविंग कम इन्वेस्टमेंट प्रॉडक्ट है, जिसमें आपका पैसा 15 साल के लिए लॉक होता है।

इसमें आप जो पैसा इन्वेस्ट करते हैं उस पर आपको गारंटीड इंटरेस्ट मिलता है। पीपीएफ में आप एक फाइनेंशियल ईयर में डेढ़ लाख रुपए तक जमा करके टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं और टैक्स बचा सकते हैं। यह छूट आपको इनकम टैक्स एक्ट 1961 में सेक्शन 80 C के अंडर मिलती है।

गारंटीड रिटर्न होने की वजह से पीपीएफ (PPF) में ऐसे लोग इन्वेस्ट करना पसंद करते हैं, जो रिस्क नहीं लेना चाहते। इसके अलावा उनको टैक्स छूट का बेनिफिट भी मिलता है।

वहीं एनपीएस (NPS) एक मार्केट लिंक वॉलेंटरी कॉन्ट्रिब्यूशन रिटायरमेंट स्कीम है। इसके जरिए आप रिटायरमेंट कॉर्पस बना सकते हैं, जिससे आपको रिटायरमेंट के बाद पूरी जिंदगी पेंशन मिलेगी और यह स्कीम 18 वर्ष की उम्र से लेकर 65 वर्ष की उम्र तक के सभी भारतीयों के लिए अवेलेबल है। एनपीएस (NPS) में इन्वेस्ट किया हुआ पैसा आप 60 साल के होने से पहले नहीं निकाल पाएंगे।

इस स्कीम का इतना लंबा लॉकइन यह इंश्योर करेगा कि इसमें इन्वेस्ट हुआ पैसा आप रिटायरमेंट के बाद की नीड को पूरा करने के लिए ही यूज करें।

हालांकि कुछ कंडीशन जैसे क्रिटिकल इलनेस, बच्चों की एजुकेशन, शादी का खर्च, घर खरीदने या बनवाने के लिए आप कुछ पैसा निकाल सकते हैं। जैसा कि हमने स्टार्टिंग में कहा था कि एनपीएस (NPS) एंड पीपीएफ (PPF) दोनों रिटायरमेंट के लिए ऑप्शन है और इसी कारण इनमें कुछ सिमिलैरिटी भी है। आइये इन सिमिलॅरिटी को देखते हैं।

NPS vs PPF: Similarity In NPS and PPF

दोनों स्कीमें लंबी अवधि की रिटायरमेंट सेविंग के लिए लॉन्च की गई हैं। दोनों स्कीमों में निवेश के लिए आपको अकाउंट खुलवाना होगा। दोनों स्कीमों में इन्वेस्ट करके आप टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं। दोनों स्कीमें लंबी अवधि की हैं और इनका लॉक इन पीरियड लंबा है।

NPSPPF
Retirement SavingYY
Open Account For InvestmentYY
Tax BenefitsYY
Long Term Lock-InYY
No Tax On Final CorpusYY
NPS vs PPF

पीपीएफ की अवधि 15 साल है और एनपीएस अकाउंट 60 साल की उम्र में मैच्योर होता है। पीपीएफ में निवेश से मिलने वाला रिटर्न टैक्स फ्री होता है। इसी तरह एनपीएस में मिलने वाला रिटर्न भी टैक्स फ्री होता है। इतना ही नहीं, मैच्योरिटी होने पर जो कॉरपस आपको मिलेगा, वह भी टैक्स फ्री होगा।

NPS vs PPF: Differences Between NPS and PPF

आपने सिमिलैरिटी तो देख ली। अब आपको इनमें क्या डिफरेंस है? वह बताते हैं। पीपीएफ में गारंटीड रिटर्न मिलता है। मौजूदा समय में यह 7.1 पर्सेंट है।

वहीं एनपीएस में गारंटीड रिटर्न नहीं है। एनपीएस का रिटर्न मार्केट रिटर्न से जुड़ा हुआ है। ऐसे में उतार चढ़ाव आता रहता। एनपीएस का लॉक इन सब्सक्राइबर के 60 साल की उम्र होने तक है।

NPSPPF
ReturnsReturn Linked To The MarketGuaranteed Return Current Rate – 7.1%
Lock-InTill The Age of 60 Years15 Years
Control On How
Your Money Gets Invested
YNo
Liable In CaseYNo
NPS vs PPF

वहीं पीपीएफ में लॉक इन पीरियड 15 साल है। पीपीएफ में आपके पैसे कैसे इन्वेस्ट होंगे, यह आप डिसाइड नहीं कर सकते हैं। वहीं एनपीएस में आप तय कर सकते हैं कि आपके पैसे किस फंड में निवेश किए जाएंगे और इसका मैनेजमेंट कौन सा फंड मैनेजर करेगा। वहीं अगर आप पर कानूनी रूप से कोई लोन है तो पीपीएफ को अटैच नहीं किया जा सकता है। लेकिन एनपीएस के साथ यह सुविधा नहीं है।

NPS vs PPF: NPS और PPF दोनों में से बेहतर कौन सा ऑप्शन है?

चलिए बात करते हैं कि इन दोनों ऑप्शंस में से बेहतर ऑप्शन कौन सा है। रिटायरमेंट सेविंग की बात करें तो पीपीएफ की तुलना में एनपीएस बेहतर है। एक एग्जाम्पल के थ्रू आपको हम बताते हैं कि ऐसा क्यों है. इस उदाहरण के द्वारा समझिये।

मान लीजिए दो दोस्त संजीव और साहिल ने 2019 में अपनी रिटायरमेंट के लिए हर साल 1.5 लाख रूपये सेव करना शुरू किया। दोनों की उम्र 25 साल है और हम सब की तरह वह भी 60 साल की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं और दोनों 2057 तक यानी जब तक रिटायर नहीं होते तब तक इन्वेस्ट करेंगे।

लेकिन उनके सेविंग का तरीका डिफरेंट है। संजीव ने एनपीएस (NPS) पर किया और साहिल ने पीपीएफ (PPF)। एवरेज पीपीएफ रेट 8 पर्सेंट मान लें और एनपीएस का एवरेज रिटर्न 10 पर्सेंट मान लें तो 60 की उम्र में उनकी इनवेस्टमेंट वैल्यू कुछ ऐसी रहेगी।

दोनों इन 35 सालों में अराउंड 52.5 लाख इन्वेस्ट करेंगे। मगर संजीव का रिटायरमेंट कॉर्पस होगा – 4.47 करोड़ रूपये और साहिल का सिर्फ 2.79 करोड़ रूपये। दोनों स्कीमों में निवेश से बनने वाली रकम में बड़े अंतर का कारण कंपाउंडिंग है।

पिछले सालों के ट्रेंड को देखें तो पता चलता है कि पीपीएफ रेट कम हो रहा है। वहीं एनपीएस 10 परसेंट से ज्यादा रिटर्न दे सकता है। ऐसे में जब दोनों रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंचेंगे तो रकम में अंतर और बढ़ सकता है।

जैसा कि आपने देखा। मार्केट लिंक्ड एनपीएस में इन्वेस्ट करने से आप काफी बड़ा कॉर्पस बना सकते हैं। वहीं पीपीएफ में रिटर्न कम होने के कारण बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाना आसान नहीं होगा।

निष्कर्ष :

तो सारांश है, की एनपीएस, पीपीएफ दोनों ही रिटायरमेंट के लिए सेव करने के ऑप्शंस हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में महंगाई को बीट करके रिटायरमेंट के लिए एक बड़ा बैंक बैलेंस आप एनपीएस से ही बना पाएंगे।

हमने देखा कि एनपीएस आपके रिटायरमेंट के लिए सेव करने का काफी अच्छा ऑप्शन है। तो अगर आप इसमें इनवेस्ट करना चाहते हैं तो निवेश करना जरूर से स्टार्ट करें।

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