Direct Benefit Transfer (DBT) new portal, हुआ लॉन्च। जाने आपका सरकारी पैसा आया की नहीं?

Sudhir Kumar
21 Min Read

दोस्तों आपको याद होगा जब देशभर में कोरोनावायरस के मद्देनजर सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान किया गया था। ऐसे में आर्थिक गतिविधियां बहुत ज्याद ठप हो गयी थी, और गरीबो को जिंदगी में आर्थिक मदद की जरुरत बहुत ज्याद बढ़ गयी थी।

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उन दिनों गरीबों और जरूरतमंदों की पोषण की समस्या खड़ी हो गई थी। उस समय सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज की घोषणा कर सीधे लाभार्थियों के खाते में डीबीटी भुगतान अवसंरचना का उपयोग कर पैसे हस्तांतरित किए थे। कोरोना के समय लगभग 37,000 करोड़ रुपए लोगों को डीबीटी (DBT) यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए दिए गए थे।

ऐसे में जटिल प्रक्रियाओं को दरकिनार कर बिना किसी देरी के जरूरतमंदों तक सहायता राशि पहुंचा दी गई थी। हालांकि कई जरूरतमंद ऐसे भी हैं जो इस लाभ को प्राप्त नहीं कर सके थे। वहीं खबरों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग अपने खाते से पैसे निकाल पाने में भी असमर्थ रहे थे।

इस तरह देखें तो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिए लाभार्थियों को लाभ पहुंचाने से भ्रष्टाचार की आशंका पर विराम लगा है। लेकिन करोड़ों लोग अभी भी इस योजना का संपूर्ण लाभ नहीं उठा पा रहे। कहीं लोग बैंक खाते की कमी या त्रुटिपूर्ण आधार के कारण वंचित हैं तो कहीं लोग बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी के अभाव में लाभ नहीं उठा पा रहे।

सरकार डीबीटी योजना के जरिए सब्सिडी और दूसरी योजनाओं में कैश ट्रांसफर करती है, लेकिन डिजिटल अवसंरचना की कमी के कारण अभी भी कई चुनौतियां विद्यमान हैं। जाहिर है, कई मोर्चे पर अभी भी सरकार को काम करना बाकी है।

बायोमेट्रिक मिसमैच, प्रमाणीकरण विफलता और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी समस्याएं तो हैं ही, कई योजनाओं में अभी भी बिचौलियों के हस्तक्षेप के कारण भ्रष्टाचार व्याप्त है। आइए ऐसे ही कुछ पहलुओं पर विचार करते हैं।

इस लेख में हम आपको डीबीटी (DBT) यानी की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर क्या होता है, इसके क्या लाभ है, इसके क्या चुनौतियां है तथा सबसे अंत में हम यह जानेंगे की डीबीटी में अपना पैसा कैसे देखें। तो इसलिए आप इस लेख को पूरा अंत तक पढियेगा।

Direct Benefit Transfer (DBT) योजना क्या है?

सबसे पहले जानते हैं कि डीबीटी यानी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण क्या है। भारत सरकार द्वारा शुरू की गई डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) यानी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण एक ऐसी योजना है, जिसमें लाभार्थियों को धन का स्थानांतरण यानी पैसे ट्रांसफर सीधे उनके बैंक खाते में किया जाता है।

जनवरी 2013 में शुरू की गई प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना इलेक्ट्रॉनिक नकद हस्तांतरण योजना का ही हिस्सा है। उदाहरण के लिए, सार्वजनिक वितरण योजना के लाभार्थियों की सब्सिडाइज्ड योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के लाभार्थियों को कैश ट्रांसफर, छात्रवृत्ति और पेंशन स्कीम के तहत लाभार्थियों को सीधे कैश ट्रांसफर किया जाता है।

Direct Benefit Transfer (DBT) योजना को कब शुरू क्या गया था?

प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना का उल्लेख पहली बार तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने वर्ष 2011-12 में अपने केंद्रीय बजट भाषण में किया था। तब उन्होंने कहा था कि सरकार केरोसिन, एलपीजी और उर्वरकों के लिए नकद सब्सिडी का सीधे भुगतान करना चाहती है।

इन वस्तुओं के लिए सीधे नकद भुगतान करने के तौर तरीकों पर विचार करने के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक कार्यदल बनाया गया, जिसने फरवरी 2012 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

सरकार ने लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे पैसा भेजने के लिए 1 जनवरी 2013 को सीधे नकद भुगतान योजना का शुभारंभ किया। देश के 20 जिलों को इसके लिए चिन्हित किया गया और सात कल्याणकारी योजनाओं को इसके दायरे में रखा गया।

Direct Benefit Transfer (DBT) योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

डीबीटी (DBT) योजना का मुख्य उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, समावेशी विकास और कल्याणकारी उपायों को बेहतर ढंग से लागू करना है। इसमें कोई संदेह नहीं कि व्यापक भ्रष्टाचार, अकुशलता और हेराफेरी के कारण कई कल्याणकारी योजनाएं ठप हो चुकी हैं।

गरीबों के लिए डीबीटी योजना का उद्देश्य इन सभी बुराइयों से मुक्ति पाना है। डीबीटी कार्यक्रम वितरण योजना को ठीक करने के लिए एक वास्तविक और परिवर्तनकारी प्रयास है। शायद यह दुनिया का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार विरोधी कार्यक्रम है। लिहाजा सरकार को चाहिए कि सभी बुनियादी अवसंरचनाओं को बेहतर करे ताकि अंतिम व्यक्ति तक वास्तविक लाभ पहुंचाया जा सके।

Direct Benefit Transfer (DBT) कार्यक्रम के क्या लाभ हैं?

डीबीटी कार्यक्रम को अगर क्रांतिकारी परिवर्तन कहा जाए तो गलत नहीं होगा। देश का गरीब तबका, कल्याणकारी योजनाओं का 100 फीसदी लाभ पाने के लिए जो संघर्ष कर रहा था, उस संघर्ष पर इस कार्यक्रम ने विराम लगा दिया है। भारत के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी ने कहा था कि अगर गरीबों को सरकार ₹1 भेजती है तो उसे ₹0.15 ही मिल पाते हैं।

लेकिन डीबीटी कार्यक्रम के बाद यह कहा जा सकता है कि अब गरीब सरकारी योजनाओं का 100 फीसदी लाभ उठा पाने में सक्षम हैं। देखा जाए तो यह योजना मूल रूप से उस धन का दुरुपयोग रोकने के लिए है, जिसे किसी भी सरकारी योजना के लाभार्थी तक पहुंचने से पहले ही बिचौलिए और भ्रष्ट अधिकारी हड़पने की जुगत में रहते हैं।

इस कार्यक्रम से जुड़ी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी बिचौलिये का कोई काम नहीं है और यह योजना सरकार तथा लाभार्थियों के बीच सीधे चलाई जा रही है। लाभार्थियों के खाते में सीधे पैसे पहुंचने से फर्जीवाड़े की आशंका दूर हो गई है।

डीबीटी के लिए लाभार्थियों के खाते का आधार से जुड़ा होना अनिवार्य होता है। ऐसे में लाभ की राशि सही व्यक्ति को ही मिलती है। ऐसे में न तो कोई अन्य व्यक्ति अवैध तरीके से किसी लाभार्थी का पैसा ले सकता है और न ही एक लाभार्थी एक ही लाभ को दो बार प्राप्त कर सकता है।

यानी यह कार्यक्रम लाभ के दोहराव पर भी अंकुश लगाता है। इसका दूसरा बड़ा फायदा है कि इस माध्यम से लाभार्थियों को होने वाले भुगतान में देरी नहीं होती। यानी इस माध्यम से जल्दी और लक्षित समय में लाभार्थियों को मदद पहुंचाई जाती है।

दरअसल, पहले लाभार्थियों तक राशि पहुंचाने में कई औपचारिकताएं पूरी करनी होती थीं, जो लंबी और जटिल प्रक्रिया थी। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण ने इन सभी औपचारिकताओं को खत्म कर दिया और प्रक्रिया को आसान बना दिया।

इससे जरूरतमंदों को त्वरित लाभ पहुंचाने में आसानी हुई। वर्तमान में लॉकडाउन के दौरान कुछ ही दिनों में करोड़ों लाभार्थियों के खाते में मदद पहुंचाना इसी का एक पहलू है। इसका तीसरा फायदा यह है कि इसमें लाभार्थियों को सटीक ढंग से लक्षित करके मदद पहुंचाई जाती है।

दरअसल, विभिन्न योजनाओं में लाभ पा चुके लाभार्थियों का एक डेटाबेस सरकार के पास उपलब्ध है। इस डेटाबेस में लाभार्थियों की सूची उनकी आर्थिक स्थिति के आधार पर तैयार की गई है। ऐसे में किसी भी योजना का लाभ गरीबों तक पहुंचाने में यह डेटाबेस मदद करता है।

इसके माध्यम से उचित लाभार्थियों की पहचान कर ली जाती है। पहले पीडीएस या सार्वजनिक वितरण योजना जैसी योजनाओं में वस्तुएं बाजार मूल्य से कम पर मिलती थीं, जिसके चलते यह कालाबाजारी का कारण बन गई थी। इलेक्ट्रॉनिक नकद हस्तांतरण के तहत अब लाभार्थी के खाते में सब्सिडी की राशि का नकद हस्तांतरण कर दिया जाता है, जिससे कालाबाजारी की समस्या से निजात मिलती है।

इसके साथ ही अवैध राशन कार्डों की समस्या से भी मुक्ति मिल गई है। मनरेगा जैसी योजनाओं में मजदूरी को सीधे बैंक खातों में भेजे जाने से बिचौलियों तथा फर्जी जॉब कार्ड की समस्या का भी समाधान होता दिख रहा है। लाभार्थियों के बैंक खातों को आधार से जोड़ देने पर फर्जी लाभार्थियों की समस्या से और प्रभावी ढंग से निपटा जा रहा है।

Direct Benefit Transfer (DBT) के क्या नुकसान और चुनौतियां है?

इन तमाम सफलताओं के बावजूद इस कार्यक्रम में अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, जिन पर बात करना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं इसकी राह में क्या चुनौतियां हैं।

इसमें कोई दो राय नहीं कि डीबीटी (DBT) कार्यक्रम ने भ्रष्टाचार को खत्म करने की उम्मीद जगाई है और इसके कई फायदे दिख भी रहे हैं। लेकिन इस योजना की राह में अभी भी कई रुकावटें मौजूद हैं। सब्सिडी की रकम को सीधे खाते में नकद ट्रांसफर कर देने से लोगों द्वारा इस धन का उपयोग किसी अन्य मद में कर देने का खतरा रहता है।

परिवार के पुरुष मुखिया के खाते में धन हस्तांतरण से शराब और सट्टेबाजी में धन का दुरुपयोग होने की आशंका रहती है। लिहाजा कुछ योजनाओं में जहां तक संभव हो धन का हस्तांतरण परिवार के महिला प्रमुख के खाते में किया जा रहा है।

दूसरी चुनौती है कि जनधन खातों के बाद भी भारत में बैंक खाताधारकों की संख्या कम है और यह नकद हस्तांतरण योजना के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लोग बैंक खाते से वंचित हैं। ऐसे में उचित लाभार्थी का लाभ पाने से वंचित रह जाना स्वाभाविक है।

बैंक खाता नहीं होने के कारण सरकार के डेटाबेस में वे शामिल नहीं हो पाते और यह उनके वंचित रह जाने की बड़ी वजह है। बायोमेट्रिक मिसमैच, प्रमाणीकरण, विफलता और इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी समस्याएं वर्तमान में भी ग्रामीण क्षेत्रों में बरकरार हैं, जो इस कार्यक्रम की सफलता को नकारात्मक रूप में प्रभावित कर रहीं हैं।

इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर होने से वे इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण का फायदा उचित ढंग से नहीं उठा पाते। फिर लोगों का इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से ज्यादा सहज न होना भी एक समस्या है। मोबाइल जैसे जरूरी उपकरणों की सही समझ नहीं होने से डिजिटल इंडिया और डिजिटल पेमेंट यानी कैशलेस इंडिया का सपना तो अधूरा है ही, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण का पूर्ण लाभ भी नहीं मिल पा रहा।

इससे इतर ग्रामीण क्षेत्रों में कई बड़ी योजनाओं में बिचौलियों का हस्तक्षेप अभी भी इस कार्यक्रम की कामयाबी में बड़ी बाधा है। आवास योजना जैसी बड़ी लाभकारी योजनाओं में बिचौलिए और भ्रष्ट अधिकारी अभी कमीशन खोरी कर रहे हैं। जिसके कारण लाभार्थियों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। जाहिर है भ्रष्टाचार को खत्म करना सबसे बड़ा लक्ष्य है जो कि अभी भी मौजूद है।

सरकार Direct Benefit Transfer (DBT) के बारे में आगे क्या विचार क्या कर रही है?

जैसा कि हमने पहले ही जिक्र किया, डीबीटी योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए अभी भी देश में बैंक खाता धारकों की कमी है। ऐसे में गैर खाताधारकों को लाभ पहुंचाना सुनिश्चित नहीं हो पाता। लिहाजा इस योजना को सफल बनाने के लिए बड़ी संख्या में बैंकों में खाता खोलने और लोगों को वित्तीय रूप से जागरूक करने की आवश्यकता है।

वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने की राह में यह बड़ा कदम होगा। दूसरी समस्या इंटरनेट कनेक्टिविटी की है। यह समस्या अमूमन ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है। ऐसे में गांवों को इंटरनेट से जोड़ना बेहद जरूरी है। डिजिटल इंडिया अभियान को प्रोत्साहन देकर लोगों को तकनीकी रूप से सहज बनाने की दिशा में कार्य करना होगा। हालांकि सरकार ने हाल ही में नेशनल ब्रॉडबैंड मिशन लॉन्च किया है।

इसका उद्देश्य 2022 तक सभी गांवों को ब्रॉडबैंड से लैस करना है। मोबाइल टावरों की संख्या साढ़े 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख करने की योजना है। इसके अलावा डीबीटी कार्यक्रम को आधार संख्या के साथ जोड़ने के बावजूद आधार कार्ड का त्रुटि रहित नहीं होना एक बड़ी समस्या है।

इसके चलते या तो लाभार्थियों को देरी से लाभ मिलता है या फिर लोग वंचित रह जाते हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि प्रत्येक व्यक्ति का त्रुटि रहित आधार कार्ड बने और त्रुटिपूर्ण कार्ड में तेजी से संशोधन हो। नीति और राजनैतिक हलकों में पहले यह बात आम थी कि भारत में सेवा वितरण योजना की कड़ी बेहद कमजोर है और सरकार लोगों तक पैसे उसी रास्ते से भेज रही है जिसमें सही लोगों तक लाभ पहुंचना मुश्किल है।

Direct Benefit Transfer (DBT) का लाभ पाने के लिए सबसे जरुरी चीज़ क्या है?

डीबीटी के लिए सबसे जरूरी है कि प्रत्येक लाभार्थी के पास आधार संख्या हो और वह आधार नंबर उसके बैंक खाते से जुड़ा हो। आधार लिंक्ड बैंक खातों के माध्यम से लाभ सीधे लाभार्थियों को हस्तांतरित किए जाते हैं।

डीबीटी कार्यक्रम की सबसे बड़ी बात है कि यह डोर टू डोर लाभार्थियों को होने वाले संवितरण को सक्षम बनाता है। संपूर्ण योजना आधार पेमेंट ब्रिज और आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम पर चलाई जाती है, जो दैनिक आधार पर लाखों लेनदेन को संभव बना सकती है।

अभी तक सरकार द्वारा चलाई जा रही लगभग सभी कल्याणकारी योजनाओं में लाभार्थियों के चयन में सरकारी मानदंड का पालन न करना, अवैध लाभार्थी योजना में धन का दुरुपयोग आदि से संबंधित काफी समस्याएं मौजूद थीं।

इसलिए लाभार्थियों के खाते में सीधे धन के स्थानांतरण से इस तरह की तमाम समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। एक बड़े विजन को ध्यान में रखकर इस योजना की शुरुआत की गई और इसके कई लाभ सामने भी आ रहे हैं।

Direct Benefit Transfer (DBT) स्टेटस चेक करने की प्रक्रिया क्या है?

डीबीटी (DBT) योजना के अंतर्गत अपना खाता का पैसे की जांच करने के लिए लाभार्थी को सबसे पहल यह सुनुश्चित करना होगा की वे सरकार द्वारा किसी योजना में रेजिस्टर्ड है या नहीं।

अगर कोई कैंडिडेट्स सरकार की किसी भी योजना में रजिस्टर्ड नहीं है जो सब्सिडी के रूप में पैसे को डायरेक्ट लाभार्थी के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करती है तो उनका स्टेटस की जांच नहीं हो पायेगी।

ऐसे में चेक करने वाले व्यक्ति को सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजना में रजिस्टर्ड होना चाहिए। तभी वे डीबीटी योजना का फायदा ले सकते हैं।

आप डीबीटी के अंतर्गत चालये जाने वाली योजना का लिस्ट इस वेबसाइट पर – https://dbtbharat.gov.in/central-scheme/list  जा कर चेक  कर सकते हैं। जहाँ पर सभी डीबीटी के अंतर्गत आने वाली योजना का लिस्ट दिया गया है।

  • उसके बाद अपना स्टेटस की जाँच करने के लिए कैंडिडेट्स को ऑफिसियल वेबसाइट – https://pfms.nic.in/Home.aspx पर जाना होगा।
  • उसके बाद इस वेबसाइट के होम पेज पर आपको भुगतान स्तिथि का विकल्प को चयन करना होगा।
  • उसके बाद कैंडिडेट्स को डीबीटी स्टेटस ट्रैकर के विकल्प को चयन करना होगा।
  • फिर इसके बाद सभी योजना की लिस्ट ओपन हो जाएगी, जिन्में उन्हें रजिस्टर्ड हुए योजना को सेलेक्ट करना होगा।
  • उसके बाद कैंडिडेट्स को अपना आवेदन Id और लाभार्थी कोड को दर्ज करना होगा।
  • उसके बाद कैप्चा कोड के विकल्प पर चयन करके कॅप्टचा कोड को फील करना पड़ेगा।
  • और फिर अंत में जैसे ही वे सबमिट के ऑप्शन पर चेक करेगा, कैंडिडेट्स की डीबीटी की स्तिथि का विवरण आ जाएगी।

Direct Benefit Transfer (DBT) पेमेंट स्टेटस चेक कैसे करें?

ऊपर बुलेट पॉइंट के माध्यम से यह बतलाया गया की कैंडिडेट कैसे अपना डीबीटी का स्टेटस चेक कर सकते हैं। आइये अब हम आपको बताते हैं की आवेदक कर्ता, अपना डीबीटी का पेमेंट स्टेटस को चेक कैसे कर सकते हैं।

  • कैंडिडेट्स को सबसे पहले “पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम “ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा।
  • उसके बाद “होम पेज “ पर “ पेमेंट स्टेटस “ के ऑप्शन का चुनाव करना है।
  • “ पैमेंट स्टेटस “ का चुनाव करने के बाद “नो योर पेमेंट“ के ऑप्शन का चुनना है।
  • उसके बाद कैंडिडेट के सामने एक नया टैब खुल कर आ जाएगी।
  • उसमे कैंडिडेट्स को अपना बैंक का नाम, और बैंक खा खाता संख्या को दर्ज करना होगा।
  • फिर एक कॅप्टचा कॉड आएगा जिसे फील कर के “सेंत ओटीपी “ के ऑप्शन का चुनाव करना होगा।
  • उसके बाद कैंडिडेट्स के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगी।
  • जैसे ही कैंडिडेट ओटीपी को दर्ज करेगा, उस व्यक्ति का पेमेंट स्टेटस यानी भुगतान की स्थिति आ जाएगी।

निष्कर्ष :

दोस्तों ऊपर इस लेख में हमने आपको डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर क्या होता है, इस योजना का क्या – क्या फायदा है, क्या – क्या चुनोतिया है, इस योजना का लाभ किन लोगो को दिया जाएगा, तथा यह भी बतलाया गया है की कैंडिडेट्स कैसे डीबीटी में अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं। अगर आपको डीबीटी से सम्बंधित कोई भी सवाल हो तो आप हमे कमेंट कर के जरूर बताये, हम आपकी मदद जरूर करेंगे। हमारा यह लेख को पढ़ने के लिए आपका बहुत – बहुत धन्यवाद।

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